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पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की आहट, भाजपा–अकाली गठबंधन पर चर्चा तेज

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चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़ी पार्टी के साथ किसी भी तरह के समझौते से भाजपा के इनकार के बाद बीते दिनों पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के हालिया बयान को अकाली दल के साथ रिश्तों की नई संभावनाओं के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा के प्रदेश महासचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी जगमोहन राजू ने दावा किया है कि अमृतपाल सिंह की पार्टी के कुछ नेताओं ने भाजपा के साथ गठबंधन का प्रस्ताव रखा था।

हालांकि, उन्होंने कहा कि भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह पंजाब में 2027 का चुनाव सभी 117 सीटों पर अपने दम पर लड़ेगी। राजू के इस बयान ने पंजाब की सियासत में नई बहस छेड़ दी है कि भाजपा किन राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रही है।

इसी बीच, दिल्ली में एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य पंजाब में संगठन को मजबूत करना है और वह सभी राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन कर रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि भविष्य की रणनीति को लेकर पार्टी सभी विकल्पों पर नजर रखे हुए है।

राजनीतिक हलकों में उनके इस बयान को शिरोमणि अकाली दल के साथ संभावित संवाद के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा और अकाली दल के रिश्तों का लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है।

तीन दशक से अधिक समय तक दोनों दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी रहे, लेकिन वर्ष 2020 में केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध के बाद शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद 2022 और 2024 के चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़े। हालांकि, लोकसभा चुनाव के बाद से समय-समय पर दोनों दलों के बीच संभावित सुलह की चर्चाएं उठती रही हैं।

उधर शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी कहा था कि फिलहाल उनकी पार्टी का पूरा ध्यान पंजाब में संगठन को मजबूत करने पर है। हालांकि, उन्होंने भाजपा के साथ भविष्य में गठबंधन की संभावना से साफ इनकार भी नहीं किया।

सुखबीर ने कहा था कि इस समय किसी प्रकार की बातचीत नहीं चल रही। अमृतपाल सिंह की पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाओं को भाजपा की ओर से खारिज किए जाने और दूसरी ओर नितिन नवीन के संतुलित बयान ने अकाली-भाजपा रिश्तों को लेकर अटकलों को फिर से हवा दे दी है।

आगामी नगर निकाय चुनावों और फिर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले दोनों दलों की रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे सकते हैं।

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