जयपुर, 23 जनवरी। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि भारतीय प्रतिभा का लोहा विश्व मानता है। अतः आज जो पदक और उपाधि मिली हैं, उसका उपयोग युवा राष्ट्र निर्माण के कार्यों में करें। उन्होंने कहा कि वही समाज और राष्ट्र आगे बढ़ता है, जहां शिक्षा का प्रसार होता है। राज्यपाल श्री बागडे शुक्रवार को कोटा के सिआम ऑडिटोरियम में कोटा विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विभिन्न पदक एवं उपाधि प्राप्त करने वाले दीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्री बागडे ने कहा कि यह बहुत बड़ा संयोग है कि कोटा विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह विद्या की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस, बसंत पंचमी पर मनाया जा रहा है। बसंत पंचमी जीवन में नवीन ऊर्जा और आनंद का संचार करती है। यह मां सरस्वती से आशीर्वाद लेकर शिक्षा से जीवन को उन्नत करने का भी पावन पर्व है। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल सूचना देना नहीं बल्कि व्यक्तित्व का उत्कर्ष करना है। व्यक्तित्व का उत्कर्ष तभी होगा जब पाठ्य पुस्तकों के साथ-साथ विद्यार्थियों को जीवन व्यवहार की शिक्षा भी दी जाए। शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्ति को एक अच्छा मनुष्य बनाना है जो श्रेष्ठ जीवन मूल्यों से समन्वित हो। नई शिक्षा नीति इसी आलोक में तैयार की गई है जिसमें विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर बल दिया गया है। श्री बागडे ने कहा कि विश्वविद्यालयों के आचार्य नित-नए ज्ञान से अपने विद्यार्थियों को लाभान्वित करें। विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच विकसित की जाए और फीडबैक लेने का मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक पाठ्यक्रम से जुड़े प्रश्नों का गहराई से विश्लेषण करते हुए विद्यार्थियों से सवाल पूछे और उनकी प्रतिक्रिया लें। इससे बच्चों में उत्साह बढ़ता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में शोध को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 130वीं जयंती भी है। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की स्मृति को मैं नमन करता हूं। दीक्षांत समारोह में ऊर्जा मंत्री श्री हीरालाल नागर ने कहा कि आज जो विद्यार्थी यहां से उपाधि और पदक लेकर जा रहे हैं, उनका जुड़ाव हमेशा इस विश्वविद्यालय से बना रहे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में राष्ट्र प्रथम की भावना सदैव विद्यमान रहनी चाहिए। इसी भावना से वे भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करें। विद्यार्थी नौकरी करने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनकर अपने कौशल से नए स्टार्टअप शुरू करें। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने कुलाधिपति महोदय के निर्देशानुसार चतुर्थ चरण में पचेल कला और हनोतिया गांव को गोद लिया है। जिनके सर्वांगीण विकास के लिए विश्वविद्यालय प्रयासरत् है। दीक्षांत समारोह में 80,117 उपाधियों का वितरण किया गया।
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