Home राज्य दिल्ली/एनसीआर पराक्रम दिवस केवल नेताजी की वीरता का स्मरणोत्सव नहीं है, बल्कि प्रत्येक भारतीय के लिए राष्ट्र की सेवा करने का एक आह्वान है: उपराष्ट्रपति
दिल्ली/एनसीआरराज्यराष्ट्रिय

पराक्रम दिवस केवल नेताजी की वीरता का स्मरणोत्सव नहीं है, बल्कि प्रत्येक भारतीय के लिए राष्ट्र की सेवा करने का एक आह्वान है: उपराष्ट्रपति

Share
Share

उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज ओडिशा के कटक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जन्मस्थान संग्रहालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पराक्रम दिवस समारोह में शामिल हुए। उपराष्ट्रपति ने सभा को संबोधित करते हुए नेताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें देश का महान सपूत बताया। उन्होंने नेताजी की जन्मभूमि की अपनी यात्रा को अत्यंत ज्ञानवर्धक बताया और कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने न केवल देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, बल्कि स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र के शासन के लिए उनका स्पष्ट दृष्टिकोण भी था। उन्होंने कहा कि नेताजी ने भारत को एक मजबूत, शक्तिशाली और गरीबी मुक्त राष्ट्र के रूप में देखा था। भारतीय राष्ट्रीय सेना के आरोही गीत “कदम कदम बढ़ाए जा” की उत्साहवर्धक धुन को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के लिए नेताजी का दृष्टिकोण राष्ट्र को प्रेरित करता रहता है। उन्होंने लोगो से  नेताजी के साहस, एकता और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च समर्पण के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए, 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने का सामूहिक संकल्प लेने का आग्रह किया । उपराष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा भारत की सभ्यतागत यात्रा में एक विशेष स्थान रखता है, जहाँ इतिहास, आध्यात्मिकता और संस्कृति का अनूठा संगम है। उन्होंने आदिवासी विकास की दिशा में ओडिशा सरकार के केंद्रित प्रयासों, आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाने की पहलों और सतत अवसंरचना विकास की सराहना की। राज्य की प्रगति पर उन्होंने कहा कि सुशासन जारी रहने पर ओडिशा देश के अग्रणी राज्यों में से एक बनकर उभरेगा। प्राचीन काल से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक ओडिशा की समृद्ध प्रतिरोध परंपरा का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह विरासत नेताजी के क्रांतिकारी मार्ग में सशक्त रूप से प्रतिध्वनित हुई। उन्होंने कहा कि आक्रमणों का सामना करते हुए अपनी पहचान को संरक्षित रखने वाली इस भूमि ने नेताजी के इस संदेश को गहराई से समझा कि स्वतंत्रता समर्पण से नहीं, बल्कि साहस और एकता से प्राप्त होती है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का रिकॉर्ड किया गया भाषण प्रसारित किया गया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2021 से नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाकर और रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखकर उन्हें उचित सम्मान प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का निर्णायक नेतृत्व, निडर दृष्टिकोण और राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता वास्तव में  पराक्रम की भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि पराक्रम दिवस केवल नेताजी की वीरता को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि प्रत्येक भारतीय के लिए राष्ट्र की सेवा में साहसपूर्वक कार्य करने का आह्वान है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि नेताजी की जीवन कहानी ने उनके स्वयं के हृदय में देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित किया। इससे उन्हें जीवन भर लोक सेवा और राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिली। उपराष्ट्रपति ने स्मृति कार्यक्रम के अंतर्गत आईएनए डाक टिकट गैलरी, संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रदर्शनी और नेताजी संस्कृति भवन का लोकार्पण भी किया। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी के नेतृत्व में ओडिशा सरकार द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से नेताजी को उचित सम्मान देने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संग्रहालय और प्रदर्शनियां युवा पीढ़ी को भारत की स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए अपार बलिदानों और कठिनाइयों को समझने में मदद करेंगी।  उपराष्ट्रपति ने स्वतंत्रता सेनानी श्री मायाधर मल्लिक और विंग कमांडर बी.एस. सिंह देव (सेवानिवृत्त) को सम्मानित किया और आईएनए के पूर्व सैनिकों के परिवारजनों को भी सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सैनिकों के साहस, बलिदान और निस्वार्थ सेवा का सदा ऋणी रहेगा। इस अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस जन्मस्थान संग्रहालय का एक विशेष आवरण भी जारी किया गया।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don't Miss

रातों-रात पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर बनाया रिकॉर्ड, बढ़ गए इतने फॉलोअर्स

CJP प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच आज (शनिवार को) फिर से मीटिंग होने वाली है। प्रोटेस्टर्स की ये मीटिंग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे...

हिमाचल के निजी स्कूलों पर सख्ती, यूनिफॉर्म-जूते बेचने पर रद्द हो सकती है मान्यता

शिमला: हिमाचल प्रदेश के निजी स्कूलों के परिसरों में यूनिफॉर्म, टाई, बैल्ट, बैज, जूते आदि की बिक्री करने पर सख्त कार्रवाई होगी। इन वस्तुओं...

Related Articles

धरमलाल कौशिक का कांग्रेस पर हमला, बोले- ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’

बिलासपुर : भारतीय जनता पार्टी ने संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं...

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, शहरी गरीबों को PMAY-Urban 2.0 में स्टांप ड्यूटी से राहत

चंडीगढ़। शहरी गरीबों को प्रदेश सरकार ने बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री आवास...

हरियाणा की नई MSME नीति लॉन्च, ₹55 हजार करोड़ निवेश और 5 लाख रोजगार का लक्ष्य

चंडीगढ़। हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति लांच कर दी गई है।...