कुलदीप कुमार देहरादून -अकादमी के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर जयपाल सिंह ने अध्यक्षता करते हुए सभी आरक्षित वर्गों को महिलाओं और युवाओं को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझना चाहिए । इसके लिए समर्पण और एक जुटता जरूरी है । श्री देवेंद्र सिंह महासचिव इंटरनेशनल ह्यूमन राइट काउंसिल ने कहा कि अनेक संगठनों के बनने से समाज कमजोर हो रहा है । हमारी सोच और एकजुटता भी कमजोर हो रही है । हम पद प्रतिष्ठा या कुछ धन के लालच में अपने व्यक्तिगत मंसूबे और एजेंडा को लेकर काम करते हैं तो सामाजिक सोच समाप्त हो जाती है । श्री सिंह ने सामाजिक एकता और विकास के साथ-साथ वर्तमान में भारत सरकार द्वारा यूजीसी अधिनियम पर भी चर्चा की। देश में व्याप्त हो रही धार्मिक कट्टरता उन्माद और अंधविश्वास तथा पाखंड के खिलाफ एक वैचारिक क्रांति की आवश्यकता पर जोर दिया जो महापुरुषों के उपदेश अनुसार संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करते हुए बहुजन समाज का भविष्य सुधार सके। सभी संगठन व्यक्तिवाद पर काम कर रहे हैं इसलिए हमें प्रदर्शनकारी क्रांति के बजाय वैचारिक क्रांति लानी चाहिए। गोष्ठी में उत्तराखंड अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग महासभा के अध्यक्ष रघुनाथ लाल आर्य, संरक्षक दिलीप चंद्र आर्य, भारतीय शुद्ध संघ के अध्यक्ष प्रीतम सिंह कुलवंशी सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखें । इस अवसर पर श्री चंद्रपाल सिंह को अकादमी का महासचिव नियुक्त किया गया। अकादमी के उज्जवल भविष्य और नए आयाम हासिल करने के लिए शुभकामनाएं दी गई। सभा का समापन श्री चंद्र सेन जो महासचिव पद से स्वास्थ्य कारणों से निवृत हुए, उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया।
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