नई दिल्लीः भाजपा ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ‘मिशन पंजाब 2027’ की शुरुआत कर दी है. पार्टी नेतृत्व कांग्रेस की बढ़ती आंतरिक कलह और ‘आप’ सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष का फायदा उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस में चल रही खींचतान के बीच कुछ कांग्रेस नेताओं की भाजपा से नजदीकियां बढ़ती जा रहीं हैं.
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने जून के अपने तीन दिवसीय पंजाब दौरे के दौरान स्पष्ट संकेत दिए थे कि पार्टी राज्य में इतिहास रचने की तैयारी में है. जालंधर और लुधियाना में आयोजित कार्यक्रमों में नबीन ने कहा था कि, “पंजाब बदलाव के लिए तैयार है. लोग भाजपा पर भरोसा जता रहे हैं. पार्टी का मुख्य एजेंडा राज्य को संकट से बाहर निकालकर सुरक्षित, समृद्ध और मजबूत बनाना है. भाजपा पंजाब में इतिहास लिखेगी.”
नितिन नबीन ने नशे की समस्या को गंभीर मुद्दा बताते हुए इसके खिलाफ एकजुट लड़ाई का आह्वान भी किया था. अब पार्टी अध्यक्ष के ऐलान को अमलीजामा पहनाने के लिए योजनाओं पर काम भी शुरू कर चुकी है. भाजपा आनेवाले दिनों में पंजाब को लेकर और भी आक्रामक प्रचार अभियान शुरू करने वाली है जो राज्य की भगवंत मान सरकार पर सीधा सीधा अटैक होगा.
सूत्रों की माने तो पार्टी ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मंत्र पर जोर देगी और ड्रग्स और राज्य की कानून व्यवस्था पर अपने केंद्रीय मंत्रियों के प्रेस वार्ता के माध्यम से मान सरकार पर निशाना साधेगी.
भाजपा वैसे तो पंजाब में पहले से ही चुनावी अभियान शुरू कर चुकी है,पार्टी ने इस दिशा में शुरुआत मई-जून में ही केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त कर कर दिया था. ढिल्लों, पार्टी के पहले जाट सिख प्रदेश अध्यक्ष हैं. जिसके माध्यम जाट सिख समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. इससे पहले सुनील कुमार जाखड़ और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे कांग्रेस के दिग्गज नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं.
इस बार भाजपा कांग्रेस की आंतरिक कलह का फायदा उठाने की कोशिश में भी है, क्योंकि कांग्रेस पंजाब में गहरे आंतरिक संघर्ष से जूझ रही है. प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी गुट सहित अन्य नेताओं की ओर से असंतोष व्यक्त किया जा रहा है. संगठनात्मक फेरबदल के बाद कांग्रेस में गुटबाजी अब सतह पर आ चुकी है.
2022 के चुनाव में कांग्रेस 18 सीटों पर सिमट गई थी. अब 2027 से पहले भी पार्टी में नेताओं के बीच मतभेद सतह पर आ चुके हैं. भाजपा सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की इस कमजोरी का पूरा फायदा उठाया जाएगा. पार्टी पहले ही कई कांग्रेस नेताओं को अपने पाले में ला चुकी है और संगठन को मजबूत करने पर फोकस कर रही है. भाजपा सूत्रों ने मुताबिक कुछ और भी नेता पार्टी के संपर्क में हैं.
भाजपा 2027 में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है. इसको लेकर दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की बैठकें हुईं. संगठनात्मक पुनर्गठन और आगामी दौरों पर चर्चा हुई. मुद्दों पर फोकस- नशा, भ्रष्टाचार, बाढ़ प्रबंधन की कमी और राज्य के बढ़ते कर्ज जैसे मुद्दों को भुनाने की कोशिश.
पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा सिख धार्मिक संस्थाओं, दलित और ग्रामीण वोटरों तक पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास अभियान भी चला सकती है. सूत्रों का कहना है कि पार्टी केंद्रीय नेतृत्व को और सक्रिय कर रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य केंद्रीय मंत्रियों के पंजाब दौरे जल्द होने की संभावना है. इन दौरे में प्रेस कॉन्फ्रेंस, कार्यकर्ता सम्मेलन, कार्यकर्ता बैठकें और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी.
नितिन नबीन के दौरे के दौरान भी संकेत दिए गए थे कि केंद्रीय नेतृत्व के और अधिक दौरे होंगे. भाजपा कार्यकर्ताओं को ‘डबल इंजन’ सरकार का नारा देने और पश्चिम बंगाल जैसी सफलता दोहराने के लिए तैयार रहने को कहा गया है. पंजाब में आप सरकार के खिलाफ नशा, बाढ़ और कर्ज जैसे मुद्दों पर असंतोष बढ़ रहा है, जबकि शिरोमणि अकाली दल भी कमजोर स्थिति में है.
भाजपा इन सबका लाभ उठाकर अपना विस्तार करना चाहती है. भाजपा नेताओं का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकास के एजेंडे पर पंजाब के लोग भरोसा करेंगे. वहीं विपक्षी दल इसे ‘राजनीतिक चाल’ बता रहे हैं. पंजाब की राजनीति में 2027 के चुनाव से पहले सभी दल सक्रिय हो चुके हैं. भाजपा की यह आक्रामक रणनीति राज्य में विपक्षी पार्टियों के बीच टकराव को और बढ़ा सकती है, जिसके जवाब में भी पार्टी अभी से फूलप्रूफ प्लान तैयार कर रही है.
वहीं कांग्रेस की चल रही अंदरूनी उठापटक पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने कहा कि गांधी नेहरू परिवार के परिवारवादी परिक्रमावादी कार्यशैली के कारण लगातार पंजाब के साथ न्याय नहीं किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ही पंजाब की भावनाओं के विरुद्ध कार्य किया. आज भी पंजाब कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाज दिल्ली दरबार के फरमान से दबाई जा रही है.
कांग्रेस की इस अंदरूनी लड़ाई पर भाजपा पैनी नजर रख रही है. चरणजीत चन्नी के लिए बढ़ रही हमदर्दी भी कहीं ना कहीं एक संकेत जरूर दे रहे कि पंजाब में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आता जा रहा है पार्टियों के बीच एक दूसरी पार्टियों में सेंध लगाने की रणनीति भी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनती जा रही है.
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