Home Uncategorized विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में पहुंच रहा नशे का सामान, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जताई नाराजगी
Uncategorizedउत्तर प्रदेशराज्य

विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में पहुंच रहा नशे का सामान, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जताई नाराजगी

Share
Share

गोरखपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सभी राज्य विश्वविद्यालयों से अपने गोद लिए गांवों में विशेष नशामुक्ति अभियान चलाएं। यदि विश्वविद्यालय इस दिशा में प्रभावी पहल करें तो गांवों की कई पीढ़ियों को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 100 दिवसीय नशामुक्ति अभियान को पूरी गंभीरता से लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के केंद्र भी हैं।

वह बुधवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमयूटी) के 11वें दीक्षा समारोह की अध्यक्षता कर रहीं थीं।विश्वविद्यालय परिसर स्थित रमन छात्रावास में शराब की बोतलें और सिगरेट मिलने पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है। समारोह में विद्यार्थियों के अभिभावक भी उपस्थित हैं और ऐसे हालात किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए चिंताजनक हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में इस प्रकार की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। संभव है कि ये सामग्री सफाईकर्मी अथवा किसी अन्य माध्यम से बाहर से आई हो, लेकिन इसपर प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित की जानी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि केवल डिग्री हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य अच्छा नागरिक बनना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना है। इस वर्ष विश्वविद्यालय में 60 प्रतिशत छात्राओं और 40 प्रतिशत छात्रों ने उपाधियां प्राप्त की हैं, जो महिला सशक्तीकरण का सशक्त उदाहरण है।

बेटियां आज शिक्षा, विज्ञान, खेल और प्रशासन सहित हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। साथ ही उन्होंने दहेज, घरेलू हिंसा और सामाजिक कुरीतियों पर चिंता जताते हुए बेटियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और संस्कारित बनाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के सबसे बड़े संवाहक हैं। विद्यार्थियों को उनके अनुभवों से सीख लेकर परिवार में सम्मान, संवाद और विश्वास की परंपरा को मजबूत करना चाहिए। विवाह के बाद दोनों परिवारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करना भी सामाजिक समरसता के लिए आवश्यक है।

उन्होंने जल संरक्षण, प्लास्टिक के कम उपयोग, अपशिष्ट जल प्रबंधन, सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग तथा स्वच्छ एवं हरित परिसर विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सभी विश्वविद्यालय उदाहरण प्रस्तुत करें और किए गए कार्यों की जानकारी भी उपलब्ध कराएं।

राज्यपाल ने गोद लिए परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि वहां के शिक्षकों ने कई ऐसी प्रेरक कहानियां खोजकर प्रस्तुत की हैं, जिन्हें संकलित कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा और विद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा। ताकि विद्यार्थियों को स्थानीय प्रेरणास्रोतों से सीखने का अवसर मिल सके।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don't Miss

फिरोजपुर देहाती में 2027 की बिसात बिछी, दावेदारों की बढ़ी सक्रियता से सियासी समीकरण गर्म

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले फिरोजपुर देहाती हलके में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बार आम आदमी पार्टी (आप), कांग्रेस...

पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत का निधन, जालंधर की राजनीति में शोक की लहर

पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से जालंधर की...

Related Articles

उत्तराखंड के 4 वीर शहीदों को सम्मान, गांवों में बनेंगे शहीद स्मारक और द्वार

देहरादून: देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च...

उत्तराखंड के उपनल कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, न्यूनतम वेतन और DA को लेकर शासन के निर्देश जारी

देहरादून: उत्तराखंड में उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों...