रांचीः भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (CAG) ने झारखंड में मनरेगा सहित जल जीवन मिशन एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक गड़बड़ी पाए जाने पर आपत्ति जताई है.
महालेखाकार कार्यालय द्वारा साल 2019 से 2024 के बीच राज्य में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा के कामकाज में आपत्ति जताते हुए विस्तृत रिपोर्ट सरकार के समक्ष सौंपा है.
इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और राज्य के राजस्व आधारित रिपोर्ट भी सार्वजनिक की गई है. प्रधान महालेखाकार इंदु अग्रवाल ने मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर उपस्थापित करने के बाद मंगलवार शाम मीडियाकर्मियों के समक्ष एक साथ इन सभी पांच रिपोर्ट को जारी करते हुए विस्तार से जानकारी दी.
मनरेगा मजदूरों के वेतन मद की राशि पुराने वाहनों के रख-रखाव पर हो गई खर्च
राज्य में 2019- 24 के बीच महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए महालेखाकार कार्यालय ने यह पाया है कि नरेगासॉफ्ट पोर्टल के आंकड़ों और विभाग के वित्तीय खातों में विसंगतियां हैं. जिसके कारण गिरिडीह, गुमला और पाकुड़ जैसे जिले में मनरेगा मजदूरों के लिए निर्गत 32.62 लाख पुराने वाहनों के रखरखाव पर खर्च कर दिए गए.
रिपोर्ट में मार्च 2025 तक 2019 -2024 के बीच अकुशल श्रमिकों का 321.84 करोड़ की मजदूरी का भुगतान बकाया होने का जिक्र किया गया है. महालेखाकार ने 2019-24 के बीच निष्पादित किए जाने के लिए प्रस्तावित कुल 1,02,68,484 कार्यों में से केवल 2796 044 यानी 27% ही कार्य ही पूरा होने को पाया है.
जल जीवन मिशन अपने लक्ष्य से रहा दूर
महालेखाकार ने 2019-24 के बीच झारखंड में जल जीवन मिशन को लक्ष्य से दूर होता पाया है. महालेखाकार कार्यालय के द्वारा राज्य के धनबाद सहित 06 जिलों में स्थलीय जांच के क्रम में पाया कि जिस उद्देश्य के साथ इस योजना की शुरुआत की गई थी वह लक्ष्य से दूर रहा है.
राज्य सरकार ने जेजेएम यानी जल जीवन मिशन के तहत 24 360.991 करोड़ की अनुमानित लागत से 98 067 योजनाओं की मंजूरी दी थी. इनमें से 97535 योजनाओं को 24665.29 करोड़ की लागत से शुरुआत की गई लेकिन दिसंबर 2024 तक 27 249 यदि 28% योजनाएं ही पूरी हो सकीं. इतना ही नहीं विभाग दिन वर्ष 2019 से 24 के दौरान सहायता गतिविधियों पर केंद्रीय हिस्सा का केवल 1.41 प्रतिशत यानी 83.35 करोड़ और जल गुणवत्ता निगरानी एवं पर्यवेक्षण पर 0.85% यानी 50.50 58 करोड़ ही खर्च कर सकी जबकि निर्धारित मानदंड पांच और दो प्रतिशत थे.
जेजेएमके शुभारंभ के समय यानी अगस्त 2019 में 3.45 लाख हाउसहोल्ड में नलजल योजना के तहत पेयजल पहुंचा था जो मार्च 2025 तक बढ़कर 34.31 लाख परिवार हो गया. इसके अलावा राज्य के 29398 गांव में से 6439 गांव में एफएचटीसी से आच्छादित था जबकि 6958 गांवों में नल जल योजना नहीं पहुंच पाया था. महालेखाकार ने इस संबंध में प्रशासनिक कामकाज को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए हैं.
कर राजस्व संग्रह में लगातार हो रही वृद्धि
कर राजस्व संग्रह में राज्य ने उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है. 2019-20 में जहां 16771.45 करोड़ कर राजस्व प्राप्त हुआ था. वहीं यह बढ़कर 2023 24 में 28004.76 करोड़ हो गया. राज्य उत्पाद शुल्क में 15.52% की वृद्धि दर्ज की गई जिसके पीछे का वजह नई उत्पाद शुल्क नीति और कोविड महामारी के बाद बाजार अर्थव्यवस्था में सुधार होना बताया जा रहा है.
इसके अलावा 2023 24 में 11.60 प्रतिशत की वृद्धि वाहनों पर कर के रूप में रिपोर्ट में आया है जो 2022-23 की तुलना में 10.4 एक प्रतिशत अधिक है. इसके पीछे वाहनों का विक्रय अधिक होना बताया गया है. गैर कर राजस्व में भी झारखंड ने उल्लेखनीय वृद्धि की है. इसके तहत 2019-20 में 8749.98 करोड़ से यह बढ़कर 2023- 24 में 13425.14 करोड़ हो गया.
2023-24 की तुलना में 2024-25 में जीएसडीपी में 10.87% की वृद्धि
महालेखाकार के द्वारा जारी रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2024 25 के दौरान संतुलित वृद्धि दिखाई गई है. जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में जीएसपी में 10.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. राज्य ने 2024 25 के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद में 1.56% का योगदान दिया जो पिछले 5 वर्षों में लगभग समान था.
रिपोर्ट के अनुसार 2024 25 के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व प्राप्तियां 7.46 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बड़ी जो केंद्रीय कर में वृद्धि के कारण हुआ था. 2015-16 से 2024 25 तक राजस्व प्राप्तियां 9.83% की कागर की दर से बधाई जो 4638 करोड़ से 94,489 करोड़ हो गई.
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में गड़बड़ी
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में हुई गड़बड़ी पर महालेखाकार कार्यालय ने आपत्ति जताई है. रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के तहत लाभुकों के चयन में ग्राम सभाओं और जिला और पीलिया समितियां द्वारा ठीक से सत्यापित नहीं किया गया अथवा इसे ठीक से अंतिम रूप प्रदान नहीं किया गया. जिससे 2.90 लाख ऐसे और पात्र लाभार्थी शामिल हो गए. जिन्हें बाद में योजना के क्रियान्वयन के दौरान 2017-18 से 2023 24 के बीच ग्राम सभा द्वारा हटा दिया गया.
महालेखाकार कार्यालय द्वारा इस संबंध में 6 जिलों के 60 ग्राम पंचायत में स्थलीय जांच की गई. जिसमें इस तरह की गड़बड़ी सामने आई है. महालेखाकार ने राज्य द्वारा नवंबर 2022 तक इस योजना के तहत 22.34 लाख योग्य परिवारों की जो पहचान की गई थी. उसमें बेवजह 2 साल विलंब होने के कारण भारत सरकार द्वारा केवल 16.02 लाख आवासों का आवंटन प्राप्त हुआ. जिसके कारण 6.32 लाख योग्य परिवार इस योजना में शामिल नहीं हो सके. इसी तरह राज्य में परिवहन प्राधिकरण क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों या जिला परिवहन कार्यालय की कार्य प्रणाली पर भी आपत्ति जताई है.
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