Home राष्ट्रिय गडकरी की डीपफेक के खिलाफ कानूनी लड़ाई को मंजूरी, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी सिविल केस की इजाजत
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गडकरी की डीपफेक के खिलाफ कानूनी लड़ाई को मंजूरी, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी सिविल केस की इजाजत

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मुंबई: बंबई हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को उनके खिलाफ अपलोड किए गए ‘मानहानिकारक’ डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)-जनित पोस्ट को लेकर मेटा मंच, एक्स कॉर्प, गूगल एलएलसी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दीवानी वाद दायर करने की सोमवार को अनुमति दे दी.

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता गडकरी ने ‘लेटर्स पेटेंट’ के खंड-12 के तहत अनुमति याचिका दायर की थी. यह एक प्रक्रियात्मक प्रावधान है, जिसके तहत यदि किसी वाद का कारण हाई कोर्ट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के बाहर उत्पन्न होता है, तो मुकदमा दायर करने से पहले अदालत से अनुमति लेना जरूरी होता है.

ऐसी अनुमति आवश्यक होती है, ताकि अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के बावजूद अदालत मुकदमे की सुनवाई कर सके और उसपर फैसला दे सके. न्यायमूर्ति अभय आहूजा की सिंगल बेंच (एकल पीठ) के समक्ष सोमवार को गडकरी की अनुमति याचिका पर सुनवाई हुई.

गडकरी के वकील संदीप लड्डा ने दलील दी कि ऑनलाइन मंचों ने कथित मानहानिकारक और डीपफेक सामग्री महाराष्ट्र के उपयोगकर्ताओं सहित सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई. उन्होंने कहा कि चूंकि यह सामग्री राज्य में भी उपलब्ध है, इसलिए मुकदमे की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महाराष्ट्र में भी उत्पन्न होता है.

न्यायमूर्ति आहूजा ने दलीलें स्वीकार करते हुए केंद्रीय मंत्री गडकरी को ऑनलाइन मंचों के खिलाफ दीवानी वाद दायर करने की अनुमति दे दी. गडकरी ने अपने प्रस्तावित वाद में दावा किया है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के मुद्दे को लेकर इंटरनेट पर कई फर्जी, एआई-जनित और मानहानिकारक सामग्री उपलब्ध हैं.

प्रस्तावित वाद के अनुसार, अज्ञात लोगों ने ऐसी पोस्ट और डीपफेक सामग्री अपलोड एवं प्रसारित की, जिनमें उन्हें इस कार्यक्रम (इथेनॉल मिश्रित ईंधन) के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बताया गया है और यह झूठा दावा किया गया है कि उन्हें और उनके परिवार को इससे आर्थिक लाभ हुआ है.

प्रस्तावित वाद में कहा गया है कि पोस्ट में लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे, दुर्भावनापूर्ण और घोर मानहानिकारक हैं तथा इनका उद्देश्य गडकरी के खिलाफ जनता में भ्रामक धारणा उत्पन्न करना है. गडकरी इस वाद के माध्यम से ऐसी फर्जी और झूठी सामग्री के प्रसार पर स्थायी रोक लगाने का आदेश चाहते हैं.

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