नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने एक बयान में कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त, 2026 को हुई अपनी बैठक में जजों को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर प्रमोट करने की सिफारिश की है.’
कॉलेजियम ने जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस, जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस और जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की.
जस्टिस अग्रवाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हैं, जस्टिस कोगजे गुजरात हाईकोर्ट में हैं और जस्टिस भाटी राजस्थान हाईकोर्ट में हैं. राजस्थान हाईकोर्ट के मौजूदा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा से जुड़े विवाद के बीच जस्टिस अग्रवाल की पदोन्नति अहम हो जाती है.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 26 अगस्त को कहा कि उन्होंने जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों में उठाई गई चिंताओं पर ध्यान दिया है. जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया था कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा प्रशासनिक अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्होंने राजस्थान के बाहर से किसी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की थी.
सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि पद पर मौजूद जज के खिलाफ आरोपों का निपटारा तय संस्थागत प्रक्रिया के जरिए ही सख्ती से किया जाना चाहिए. सीजेआई ने कहा कि वह और कॉलेजियम के दूसरे सदस्य पहले से ही बाकी हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर काम कर रहे हैं. एक प्रेस बयान में कहा गया, ‘उन्होंने जस्टिस संदीप मेहता के लिखे पत्रों में जताई गई चिंताओं पर ध्यान दिया है और इस बात पर जोर दिया है कि मौजूदा जज पर लगे आरोपों से तय संस्थागत तरीके से सख्ती से निपटा जाना चाहिए.’
सीजेआई ने कहा कि पत्रों में लिखी बातों पर सार्वजनिक रूप से फैसला नहीं किया जा सकता और किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का उचित मौका दिया जाना चाहिए. बयान में कहा गया, ‘सिर्फ आरोप लगने का मतलब यह नहीं है कि जज के खिलाफ कोई बात साबित हो गई है.’
उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सही स्तर पर की जा रही है और इस प्रक्रिया में जस्टिस मेहता द्वारा दी गई जानकारी और जस्टिस शर्मा के जवाब, दोनों पर विचार किया जाएगा. बयान में कहा गया, ‘कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को बनाए रखने, उनका तबादला करने या उनके खिलाफ कोई अन्य प्रशासनिक कार्रवाई करने का फैसला, सभी तथ्यों पर ठीक से विचार करने के बाद सक्षम संस्थागत अधिकारी द्वारा लिया जाएगा.’
सीजेआई ने इस बात पर भी जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट जजों से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों का निपटारा मीडिया में एक-दूसरे के दावों के जरिए नहीं होने दे सकते. जस्टिस संदीप मेहता ने कई पत्रों के जरिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से राजस्थान के बाहर से किसी को मुख्य न्यायाधीश के तौर पर तुरंत नियुक्त करने का आग्रह किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा अपने प्रशासनिक अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.
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