Home राज्य पंजाब रक्खड़ पुन्निया मेले में आस्था के साथ सियासत का रंग, 2027 चुनाव से पहले जुटे दिग्गज
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रक्खड़ पुन्निया मेले में आस्था के साथ सियासत का रंग, 2027 चुनाव से पहले जुटे दिग्गज

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अमृतसर। देश भर में रक्षाबंधन के त्योहार के बीच अमृतसर में रक्खड़ पुन्निया (राखी पूर्णिमा) मेले की भी खूब धूम है। एक आम मेले की तरह यह कोई सामान्य मेला नहीं है, बल्कि इसका ऐतिहासिक और धार्मिक जुड़ाव होने के साथ-साथ सियासी महत्व भी है।

तीन दिवसीय लगने वाले इस मेले के पहले दिन यानी शुक्रवार को पंजाब सीएम भगवंत मान, उनकी कैबिनेट, अकाली दल नेता और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ बीजेपी के कई दिग्गजों ने शिरकत की है।

यह मेला कहां आयोजित किया जाता है, इसका इतिहास क्या है और सियासी नुमाइंदों की बड़ी संख्या इस पावन धरती पर अचानक क्यों पहुंच रही है? इन सभी सवालों के जवाब यहां जानेंगे।

क्या है रक्खड़ पुन्निया मेला?

पंजाब के अमृतसर जिले में एक ऐतिहासिक स्थल है, बाबा बकाला साहिब। हर साल रक्षाबंधन वाले दिन यहां रक्खड़ पुन्निया मेले का आयोजन किया जाता है।

रक्खड़ पुन्निया यानी सावन की पूर्णिमा। इस दिन मेले में हिस्सा लेने के लिए देश भर से लाखों श्रद्धालु गुरुद्वारा साहिब में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

क्या है इतिहास?

बाबा बकाला साहिब की यह धरती तीर्थस्थल के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखती है। इसका इतिहास सिखों के 9वें गुरु श्री गुरु तेग बहादर जी से से जुड़ा हुआ है। धार्मिक इतिहास के अनुसार, श्री गुरु तेग बहादर जी ने यहां एक भोरे के अंदर रहकर लंबे समय तक तपस्या की थी। तपस्या की कुल अविध  26 वर्ष, 9 महीने और 13 दिन थी।

पंजाब की सियायत में मेले का महत्व

पंजाब की सियासत में यह मेला और जगह काफी महत्व रखती है। इस दिन सूबे और सूबे के बाहर के राजनेता मेले में शिरकत करते हैं और कॉन्फ्रेंसों के जरिए जनता से सीधा संवाद करते हैं।

इस मेले के जरिए जनता को साधना आसान होता है, क्योंकि पंजाब के लिए यह जगह धार्मिक रूप से बहुत पवित्र है और मेले के माध्यम से हजारों लोग यहां जुटते हैं, जिन्हें साधना, संवाद करना और कनेक्शन बनाना आसान हो जाता है।

रक्खड़ मेले से कैसे बदलता है सियासी माहौल?

  • मेले के दिन बाबा बकाला साहिब और रईया में राजनीतिक दलों के अलग-अलग मंच सजते हैं, जहां से नेता कॉन्फ्रेंस करते हैं।
  • मेले के जरिए राजनीतिज्ञों के लिए बाबा बकाला साहिब पंजाब के माझा बेल्ट को साधना आसान हो जाता है।
  • यह मेला दिग्गजों को शक्ति प्रदर्शन करने का मंच प्रदान करता है।
  • रक्खड़ मेले के जरिए किसानों और ग्रामीण जनता को प्रत्यक्ष रूप से संबोधित करना आसान बन जाता है।
  • मेले के मंचों से निकलने वाला सियासी संदेश लंबे समय तक चर्चा में रहते हैं।
  • अगले साल विधानसभा चुनाव है। ऐसे में इस बार मेले की महत्वत्ता और अधिक बढ़ गई है।

किस-किस पार्टी ने लिया हिस्सा?

आम आदमी पार्टी: आम आदमी पार्टी इस बार बाबा बकाला साहिब थोड़ा दूर रइया की अनाज मंडी में राज्य स्तरीय सम्मेलन कर रही हैं। इस मेले में मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित उनकी कैबिनेट मौजूद है।

भारतीय जनता पार्टी: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों समेत वरिष्ठ नेता मेले में पहुंचे हैं।

कांग्रेस: पूर्व मुख्यमंत्री एवं लोकसभा सदस्य चरणजीत सिंह चन्नी, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता सहित कांग्रेस कार्यकर्ता मेले में पहुंचे हैं।

शिरोमणि अकाली दल: शिरोमणि अकाली दल बादल की ओर से गुरु तेग बहादुर हॉकी स्टेडियम में किया जा रहा है, जहां कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया की अगुवाई में होने वाले कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, पूर्व कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा समेत वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

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