जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुरखी विधानसभा क्षेत्र के विधायक गोविंद सिंह के खिलाफ चुनावी हलफनामे में संपत्ति गलत जानकारी देने और तथ्य छिपाने के आरोप लगाने वाली दो याचिकाओं को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव संबंधी विवादों में सीधे रिट याचिका पोषणीय नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 329 (बी) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 80-81 के तहत चुनाव को चुनौती देने का वैधानिक माध्यम चुनाव याचिका है.
कांग्रेस प्रत्याशी नीरज शर्मा की तरफ से लगाई गई थी याचिका
सागर जिले की सुरखी विधानसभा सीट से कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी नीरज शर्मा तथा राजकुमार सिंह की तरफ से गोविंद सिंह के खिलाफ याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया सुखली विधासनसभा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में गोविंद सिंह ने अपना नामांकन दाखिल किया था. नामांकन के दौरान उन्होंने अपने हलफनामा में चल-अचल संपत्ति के संबंध में गलत जानकारी दी थी.
याचिका में मंत्री के खिलाफ आपराधिक केस भी दर्ज करने की मांग की गई थी
इस संबंध में केंद्रीय चुनाव आयोग, राज्य चुनाव आयोग तथा रिर्टनिंग अधिकारियों के समक्ष आवेदन किया गया था. याचिका में उनके अभ्यावेदन के निराकरण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये जाने की मांग की गई थी. इसके अलावा मंत्री के खिलाफ आपराधिक केस भी दर्ज करने की मांग की गई थी.
प्रतिवादियों की तरफ से तर्क दिया गया कि चुनाव संबंधी विवादों में सीधे रिट याचिका पोषणीय नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 329 (बी) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 80-81 के तहत चुनाव को चुनौती देने का वैधानिक माध्यम चुनाव याचिका है. विजेता घोषित होने के 45 दिन के भीतर चुनाव याचिका दाखिल किये जाने का प्रावधान है.
ऐसे में चुनाव आयोग को कार्रवाई के निर्देश देने के लिए रिट स्वीकार नहीं की जा सकती. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कानूनी उपाय उपलब्ध होने के कारण चुनाव आयोग को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर फैसला करने का निर्देश नहीं दिये जा सकते.
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