हरियाणा के शहरी क्षेत्रों के विकास की दिशा और आगामी बजट की प्राथमिकताएं तय करने से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शहरों की नब्ज टटोलने की तैयारी में हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शहरी स्थानीय निकायों की एक अहम समीक्षा बैठक प्रस्तावित है, जिसके लिए अभी तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन मुख्यालय स्तर से प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के अधिकारियों को पत्र जारी कर बैठक के लिए तैयार रहने के निर्देश दे दिए गए हैं। शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बैठक की सूचना अलग से दी जाएगी, लेकिन सभी आयुक्तों और जिला नगर आयुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तय एजेंडे के अनुसार पूरी तैयारी और अद्यतन रिपोर्ट के साथ बैठक में उपस्थित हों। इसके साथ ही बैठक का विस्तृत एजेंडा भी अधिकारियों को पहले ही भेज दिया गया है, ताकि चर्चा तथ्यपरक और परिणामोन्मुख हो सके। वित्त मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं प्री-बजट बैठकों का नेतृत्व कर रहे हैं। इस प्रस्तावित बैठक को बजट निर्माण की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि आगामी बजट तैयार करने से पहले शहरी क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों, चुनौतियों और संभावनाओं को सीधे फील्ड से समझा जाए। बैठक के दौरान नगर निकाय अधिकारी मुख्यमंत्री के समक्ष यह रखेंगे कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच शहरों को किन-किन बुनियादी सुविधाओं की तत्काल आवश्यकता है। पेयजल आपूर्ति, सीवरेज व्यवस्था, सड़कों की हालत, स्ट्रीट लाइट, ठोस कचरा प्रबंधन, शहरी परिवहन और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।
चालू वित्तीय वर्ष के बजट पर होगी सख्त समीक्षा
बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के लिए नगर निकायों को आवंटित बजट और उसके उपयोग की भी गहन समीक्षा की जाएगी। बजट में स्वीकृत राशि और वास्तविक खर्च व वसूली की स्थिति पर अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। बजट बनाम वास्तविक वसूली और खर्च के आंकड़ों के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि किन नगर निकायों ने लक्ष्य हासिल किए और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस दौरान वित्तीय अनुशासन और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देंगे।
निकायों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
बैठक का एक प्रमुख फोकस नगर निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना रहेगा। मुख्यमंत्री नगर निगमों, परिषदों और पालिकाओं की आय बढ़ाने के उपायों पर अधिकारियों से चर्चा करेंगे। संपत्ति कर, उपयोगकर्ता शुल्क, पार्किंग शुल्क और अन्य स्थानीय करों की वसूली में आ रही दिक्कतों पर मंथन होगा। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि नगर निकाय अपने संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर विकास कार्यों को गति कैसे दे सकते हैं।
केंद्र और राज्य की योजनाओं की प्रगति पर रिपोर्ट तलब
शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा भेजे गए एजेंडे के अनुसार बैठक में केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी होगी। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, मुख्यमंत्री घोषणाओं और बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर अधिकारियों को अद्यतन रिपोर्ट देनी होगी। इसके अलावा पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान के लिए आवश्यक शर्तों की पूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि केंद्र से मिलने वाली धनराशि में किसी तरह की बाधा न आए।
पेंशन, प्रमाण पत्र और कॉलोनियों के मुद्दे भी शामिल
बैठक के एजेंडे में शहरी क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों को भी शामिल किया गया है। वृद्धावस्था पेंशन और दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों के सत्यापन की स्थिति पर चर्चा होगी। लाल डोरा और पुरानी आबादी देह क्षेत्रों में संपत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रगति, अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण और शहरी नियोजन से जुड़े मामलों पर भी अधिकारियों से फीडबैक लिया जाएगा।
जन शिकायतों और प्रशासनिक जवाबदेही पर फोकस
जन संवाद, मुख्यमंत्री विंडो और केंद्रीय शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की स्थिति भी बैठक में रखी जाएगी। मुख्यमंत्री यह सुनिश्चित करना चाहेंगे कि शहरी नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी समाधान हो। बैठक में शहरी प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए दोहरी प्रविष्टि आधारित लेखा प्रणाली को लागू करने की प्रगति की भी समीक्षा होगी। लेखा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों की भूमिका और डिजिटल मॉड्यूल के उपयोग पर भी चर्चा होगी।
बजट से पहले सरकार का स्पष्ट संकेत
यह प्रस्तावित बैठक सरकार की उस रणनीति को दर्शाती है, जिसमें बजट से पहले शहरी क्षेत्रों की नब्ज टटोलकर ठोस और व्यावहारिक फैसले लेने पर जोर है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी नगर निकायों से सीधे संवाद कर यह संदेश देंगे कि शहरी विकास, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बैठक से निकलने वाले निष्कर्ष न केवल आगामी बजट की दिशा तय करेंगे, बल्कि आने वाले वर्षों में हरियाणा के शहरों के विकास का रोडमैप भी तैयार करेंगे।
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