सिकंदरा (जमुई)। जमुई जिले के मंजोष एवं भट्ठा मैग्नेटाइट खनिज ब्लॉकों की नीलामी में तेजी लाने के लिए बिहार सरकार के रोड-शो पर मंजोष गांव के ग्रामीणों में भारी असंतोष फैल गया है। ग्रामीणों ने साफ लहजे में कहा कि मंत्री जी रोड-शो करते रहें, हम एक इंच जमीन भी नहीं देंगे। ग्रामीणों की अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जमीन बर्बादी के साथ खनन से उनकी उपजाऊ जमीनें नष्ट हो जाएंगी। वहीं, पर्यावरणीय क्षति में सामुदायिक संसाधनों और पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंचेगा। खेती-किसानी पर निर्भर ग्रामीणों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।
मंजोष के पूर्व मुखिया विधु शेखर सिंह, ग्रामीण प्रतोष कुमार, चंद्रदेव सिंह, सुभाकांत सिंह, रंजीत सिंह, रूपेश कुमार, अनंत कुमार, सौरभ कुमार समेत कई ग्रामीणों ने कहा कि आखिर हम जाएं तो कहां? आवास यहां, खेती यहां? हम कहीं नहीं जाएंगे। सरकार जो हथकंडे अपनाए, हम एकजुट रहेंगे। जरूरत पड़ी तो सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। मंजोष सहित प्रभावित इलाकों के लोग पहले से ही विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीण नीलामी रद कने की मांग पर अडिग हैं जो प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय सहमति के अभाव में निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। ज्ञात हो कि सोमवार को पटना में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उपमुख्यमंत्री व खान एवं भू-तत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर रोड-शो आयोजित हुआ। इसमें विभिन्न राज्यों के निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि व तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। निविदा दस्तावेज डाउनलोड की अंतिम तिथि 16 जनवरी शाम पांच बजे तक निर्धारित कर दी गई है। गौरतलब हो कि वर्ष 2000 में मंजोष गांव के बच्चों ने खेलते हुए इसकी पहचान की। जीएसआई सर्वे में उच्च गुणवत्ता वाला मैग्नेटाइट लौह अयस्क (हेमेटाइट से बेहतर) पाया गया। करीब 48 मिलियन टन (4.84 करोड़ टन), अनुमानित मूल्य 25,000 करोड़ रुपये आंकी गई। सरकार का 84 हेक्टेयर से अधिक जमीन अधिग्रहित कर निजी कंपनियों को खनन अनुमति देने योजना प्रविधानित है। हालांकि, ग्रामीणों का यह रुख खनन सीमांकन व भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लंबे संघर्ष को दर्शाता है। मामला अब और तूल पकड़ सकता है।
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