Home राज्य पश्चिम बंगाल गंगासागर में लापता लोगों को अपनों से मिलाने का उठाया जिम्मा : सनत पांडा
पश्चिम बंगालराज्य

गंगासागर में लापता लोगों को अपनों से मिलाने का उठाया जिम्मा : सनत पांडा

Share
Share

गंगासागर। गंगासागर में जब उनकी बुलंद आवाज गूंजती है तो अपनों से बिछड़े तीर्थयात्रियों के मन में उम्मीद जगती है कि उन पर आया संकट जल्द दूर हो जाएगा। पिछले 22 वर्षों से पर्दे के पीछे रहकर वे मकर संक्रांति पर पुण्य स्नान करने देश-दुनिया से गंगासागर आने वाले तीर्थयात्रियों की सेवा करते आ रहे हैं। उन्हें चेहरे से कोई नहीं जानता। उनकी आवाज ही उनकी पहचान है। ये शख्स हैं सनत पांडा।

गंगासागर में मुस्तैद हैं 25 उद्घोषकों की टीम

64 वर्षीय सनत 25 उद्घोषकों की टीम के साथ गंगासागर में गुम होने वाले तीर्थयात्रियों को तलाशने में दिन-रात जुटे हुए हैं। इस टीम में बंगाल सरकार के कर्मचारियों के अलावा गुमशुदा लोगों को तलाशने वाली संस्था बजरंग परिषद के सदस्य शामिल हैं। सागर तट के ठीक सामने निर्मित विशाल टावर पर यह टीम मुस्तैद रहती है। बिछड़े लोग टावर के नीचे आकर वहां मौजूद बजरंग परिषद के सदस्यों से संपर्क करते हैं। इसके बाद एक पर्ची में उनका नाम, पता व अन्य विवरण लिखकर उसे ऊपर टावर में भिजवाया जाता है। उद्घोषकों की टीम पर्ची मिलते ही अपने काम में जुट जाती है। बिछड़े लोगों की नामों की नियमित अंतराल पर तब तक उद्घोषणा की जाती है, जब तक वे मिल नहीं जाते।

टीम में 10 भाषाओं के उद्घोषक शामिल

टीम में हिंदी, अंग्रेजी, भोजपुरी, नेपाली, ओड़िया और असमिया समेत 10 भाषाओं के उद्घोषक शामिल हैं। बंगाल सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग के पूर्व कर्मचारी पांडा ने कहा-‘उद्घोषकों की 8-8 घंटे की शिफ्ट होती है। मकर संक्रांति व उसके एक दिन पहले सबसे ज्यादा लोग गुम होते हैं। इन दिनों हमारी टीम को सांस लेने की भी फुर्सत नहीं मिलती। लगातार उद्घोषणा करनी पड़ती है। यह चुनौतीपूर्ण काम है। प्रतिदिन गुमशुदा लोगों की संख्या सैकड़ों में होती है।

गंगासागर में हर साल गुम होते हैं हजारों तीर्थयात्री

दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर इलाके के रहने वाले सनत ने आगे कहा,’गंगासागर में हर साल हजारों तीर्थंयात्री गुम होते हैं। इनमें ज्यादातर बुजुर्ग, बीमार व शारीरिक रूप से अक्षम लोग होते हैं। उन्हें रोते-बिलखते देख बहुत तकलीफ होती है, लेकिन जब वे अपनों से मिल जाते हैं तो उनके चेहरे की खुशी देखकर मन को बड़ा आनंद मिलता है। उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। कुछ तो हमारे पैरों में पड़कर धन्यवाद देने लगते हैं।’ सनत कहते हैं, ‘गंगासागर मेला एक द्वीप पर लगता है, इसलिए यहां खोने वाले अधिकांश लोग देर-सवेर मिल जाते हैं। अधिकांश लोग गुम होने के बाद हमारे टावर के पास आ जाते हैं। जो नहीं आ पाते, वे गंगासागर में एक दायरे के अंदर ही भटकते हैं इसलिए उन्हें तलाश लिया जाता है। जो तुरंत नहीं मिल पाते, उनका मेला खत्म होने के बाद स्थानीय लोगों के जरिए पता लगा लिया जाता है और उसके बाद उन्हें राज्य सरकार व बजरंग परिषद के माध्यम से घर भिजवाने की व्यवस्था की जाती है।’

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don't Miss

हल्द्वानी में BJP का महामंथन, 2027 चुनाव के लिए बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर

हल्द्वानी: बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति के अंतिम सत्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रदेश पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक की. बैठक में 2027...

उत्तराखंड में 2027 की तैयारी तेज, नितिन नबीन ने कार्यकर्ताओं को दिया ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ का मंत्र

देहरादून: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं. उन्होंनें हल्द्वानी में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की...

Related Articles

मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 10 IPS और 127 DSP समेत 137 अफसरों के तबादले

भोपाल : मध्यप्रदेश में रविवार रात पुलिस विभाग में बड़े फेरबदल किए...

रक्तदान में हरियाणा की हैट्रिक: लगातार तीसरे साल देश में बना नंबर-1, केंद्र सरकार करेगी सम्मानित

हरियाणा लगातार तीसरे वर्ष रक्तदान के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान...