Home राज्य दिल्ली/एनसीआर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की ओर से तेजी से अग्रसर—
दिल्ली/एनसीआरराजनीतिराजस्थानराज्यराष्ट्रिय

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की ओर से तेजी से अग्रसर—

Share
Share

– 2500 करोड़ रुपए लागत से निर्माणाधीन परियोजना

– 102 किलोमीटर परियोजना की कुल मुख्य नहर लंबाई

जयपुर, 7 जून। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व एवं जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा ‘अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना‘ को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए युद्धस्तर पर कार्य करवाए जा रहे हैं। वागड़ अंचल के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही इस परियोजना से जनजाति बहुल क्षेत्र में कृषि व्यवस्था एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लगभग 2 हजार 500 करोड़ रुपए लागत की परियोजना से बांसवाड़ा जिले की 3 विधानसभा क्षेत्रों (बांसवाड़ा, बागीदौरा एवं कुशलगढ़) की 6 तहसीलों बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, आनंदपुरी एवं गांगड़तलाई के 338 गांवों की लगभग 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई प्रणाली से जल उपलब्ध होगा। परियोजना से लगभग 3.5 लाख आबादी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होगी।
102 किमी मुख्य नहर लम्बाई, 22.50 किमी सुरंगें
परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग टेक्नोलाॅजी से नहर नेटवर्क एवं विभिन्न संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना की कुल मुख्य नहर लंबाई 102 किलोमीटर है। इसमें 22.50 किलोमीटर लंबाई में सुरंगे/कट एंड कवर संरचनाएं, एक्वाडक्ट तथा नदी को पार करते हुए साइफन निर्मित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लगभग 230 अन्य नहरी महत्वपूर्ण संरचनाए यथा सुपरपासेज, ड्रेनेज साइफन, रोड ब्रिज, एस्केप कम क्रॉस रेगुलेटर, हेड रेगुलेटर इत्यादि भी परियोजना में शामिल हैं।
 
प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र होगा विकसित
परियोजना के तहत अत्याधुनिक प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इससे खेत तक वैज्ञानिक एवं नियंत्रित सिंचाई स्काड़ा प्रणाली से सुनिश्चित हो सकेगी। सिंचित क्षेत्र में प्रत्येक 200 हेक्टेयर के ‘चक स्तर‘ पर लगभग 200 डिग्गियों का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्य नहर प्रणाली से इन डिग्गियों तक पानी एमएस व डीआई पाइपलाइन पहुंचाया जाएगा। इसके बाद डिग्गियों से लगभग 5 हजार कि.मी. लंबाई का भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली से खेतों तक पानी पहुंचेगा। इस आधुनिक सिंचाई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक लगभग 1.25 से 1.50 हेक्टेयर क्षेत्र पर हाइड्रेंट विकसित किए जाएंगे। इन हाइड्रेंट पॉइंट्स तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क बिछेगा, जहां से किसान सीधे सिंचाई के लिए जल प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रणाली से खेत स्तर तक समान जल वितरण, न्यूनतम जल हानि तथा अधिक दक्ष सिंचाई सुनिश्चित होगी। आधुनिक माइक्रो एवं प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली के जरिए कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो सकेगी। किसानों को निरंतर बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
 
स्काडा प्रणाली से ऑटोमाइज होगी माॅनिटरिंग
परियोजना में अत्याधुनिक स्काड़ा (पर्यवेक्षक नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) प्रणाली भी विकसित की जा रही है। इससे सम्पूर्ण प्रेशर प्रणाली आधारित तंत्र का संचालन एवं मॉनिटरिंग पूर्णतः ऑटोमाइज्ड होगी। इस प्रणाली से जल वितरण को समान रूप से सुनिश्चित करने, दबाव एवं प्रवाह को स्वचालित रूप से नियंत्रित करने तथा रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग एवं संचालन नियंत्रण की सुविधा उपलब्ध होगी। इस प्रणाली से पम्पिंग स्टेशन, रिलीफ वाल्व, हाइड्रेंट एवं विभिन्न शाखाओं में जल प्रवाह की सतत निगरानी संभव होगी। वर्तमान में नहर की 42 किलोमीटर में काम किया जा रहा है। इनटेक स्ट्रक्चर एवं स्लूइस बैरल का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। टनल कार्य, एक्वाडक्ट, साइफन, कट एंड कवर के साथ नहर से डिग्गी तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क निर्माण कार्य भी विभिन्न स्थानों पर निरंतर जारी है।
 
नियमित माॅनिटरिंग से मिली गति 
परियोजना की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा रही है। समयबद्ध और पारदर्शिता से कार्यों को पूर्ण करने के लिए निर्माण एजेंसियों को विभागीय निर्देश दिए गए हैं। इस परियोजना के लिए 78 गांवों की लगभग 270 हेक्टेयर निजी भूमि का नियमानुसार अधिग्रहण किया जा रहा है। अब तक 67 गांवों की 211 हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 47 करोड़ रुपए राशि के अवार्ड पारित हो चुके हैं। लगभग 15 करोड़ रुपए मुआवजा राशि वितरित की गई है। शेष अधिग्रहण एवं वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रियाएं भी तेजी से हो रही हैं।
सिंचाई के लिए वर्षभर मिलेगा जल
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि आगामी वर्षों में यह परियोजना बांसवाड़ा जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली मुख्य सिंचाई परियोजनाओं में शामिल होगी। इसके पूर्ण होने के बाद क्षेत्र के किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। मक्का, गेहूं, दलहन, तिलहन एवं बागवानी फसलों का रकबा बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इससे भू-जल स्तर सुधार, जल संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह परियोजना वागड़ क्षेत्र के जनजाति बहुल इलाकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don't Miss

विज्ञान और नवाचार से बनेगा विकसित उत्तराखंड : मुख्यमंत्री धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विकसित उत्तराखंड की आधारशिला हैं। राज्य सरकार उत्तराखंड को अनुसंधान, नवाचार...

विकास दुबे का साथी दयाशंकर अदालत से बरी, बिकरू कांड के 2 दिन बाद हुआ था गिरफ्तार

कानपुर। अपर जिला जज 16 अगस्त कुमार तिवारी की कोर्ट ने बिकरू कांड को अंजाम देने वाले कुख्यात विकास दुबे के साथी दयाशंकर अग्निहोत्री...

Related Articles

छत्तीसगढ़ में खेल पुरस्कारों के लिए आवेदन शुरू, 5 अगस्त तक करें अप्लाई

रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने वर्ष 2025-26 के...

गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन को बड़ी सौगात, CM मोहन यादव ने 587 करोड़ के देवस्थान विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

उज्जैन: गुरु पूर्णिमा पर्व पर धर्म नगरी अवंतिका उज्जयिनी में हर्ष उल्लास का...

हरियाणा में शुरू होगा एयर एंबुलेंस नेटवर्क, पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे हेलीपैड

चंडीगढ़। देश में तेजी से विकसित हो रही एयर मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं की...

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, 5.40 लाख CET पास युवाओं को मिलेगा 100 घंटे का काम

चंडीगढ़। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के युवाओं के रोजगार और कौशल...