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छत्तीसगढ़ राजनीति: 2028 फतह के लिए कांग्रेस का ‘राहुल और आदिवासी’ दांव, बस्तर से बिछने लगी बिसात

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में कांग्रेस राहुल गांधी, आदिवासी और उसके आधार पर 2028 फतेह की नई रणनीति को बनाने में जुटी है. आदिवासी फार्मूले को जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी जनता के बीच रख रही है उसका तोड़ आदिवासी फार्मूले के साथ ही कांग्रेस भी निकालने में लगी है. बस्तर में तीन दिनों तक हुए कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर के बाद राहुल गांधी के बस्तर दौरे को लेकर प्रस्तावित कांग्रेस के कार्यक्रम ने भारतीय जनता पार्टी के लिए आदिवासी राजनीति पर नया समीकरण तैयार करने के लिए एक मुद्दा और मसौदा दोनों दे दिया है.

आदिवासी सीएम का चेहरा दिखाकर राजनीति

छत्तीसगढ़ में मुद्दे की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी अक्सर आदिवासी मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के पद को लेकर बात उठाती रहती है. छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर आदिवासी समीकरण और आदिवासी मुख्यमंत्री के बदौलत छत्तीसगढ़ का विकास भारतीय जनता पार्टी के सबसे पहले एजेंडे में होता है. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संतोष पांडेय के अनुसार भारतीय जनता पार्टी आदिवासी विकास के लिए संकल्पित है. और इसके लिए लगातार काम भी किया जा रहा है. उनका आरोप भी यही रहा है कि कांग्रेस को जब भी सत्ता मिली है आदिवासियों के साथ सिर्फ भेदभाव किया गया है. भारतीय जनता पार्टी आदिवासी समीकरण को सबसे ऊपर रखकर इस कार्ड को इसलिए भी खेल रही है कि आदिवासी समीकरण का सबसे मजबूत आधार सरगुजा और बस्तर डिवीजन में है. यहां पर अगर भारतीय जनता पार्टी आदिवासी कार्ड के बदौलत मजबूत स्थिति में रहती है तो उसके लिए 2028 फतेह का फार्मूला आसान हो जाएगा.

मुद्दा चिंतन का है

2028 के लिए चुनावी रणनीति भले अभी दूर है लेकिन कांग्रेस पार्टी भी इस मुद्दे को लेकर अपने सटीक गुणा गणित को बैठाने में जुटी है. बस्तर में कांग्रेस के तीन दिन के प्रशिक्षण शिविर में पार्टी को लोगों के बीच किस तरीके से जाना है यह मुद्दा काफी अहम है. इसके पीछे पार्टी का मजबूत तर्क भी है और राजनीति का आधार भी है. 2014 में मोदी के प्रचंड आधार के बाद भी बस्तर लोकसभा सीट भारतीय जनता पार्टी नहीं जीत पाई थी. 2018 में छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन हो गया. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बस्तर में जीती जरूर है लेकिन जिस तरीके से जीतना चाहिए था उसे पर एक प्रश्न चिह्न जरूर लगा है.

बस्तर के कई क्षेत्र अब भी चुनौती

कांकेर की जिस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के भोजराज नाग विजयी हुए हैं उसमें जीत का अंतर काफी कम है. कांकेर संसदीय क्षेत्र हमेशा भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है. कोरबा की सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. उसके बाद सरगुजा अंचल भारतीय जनता पार्टी के गढ़ के रूप में तो जरूर है लेकिन चुनौती भी उतनी ही बड़ी है. ऐसे में आदिवासी समीकरण को साधने के लिए कांग्रेस ने बस्तर से जी प्रशिक्षण शिविर को शुरू किया है उसके एक नहीं कई मायने हैं जो एक साथ साधने की कोशिश हो रही है.

कांग्रेस का राहुल कार्ड

राहुल गांधी को अपने सबसे बड़े राजनीतिक आधार स्तंभ बनाने में जुटी कांग्रेस पार्टी के लिए छत्तीसगढ़ में राहुल गांधी का दौरा काफी महत्वपूर्ण भी हो जाता है. जून महीने में जिला अध्यक्षों की हुई बैठक में राहुल गांधी रायपुर आए थे और पार्टी कार्यकर्ताओं को काफी मजबूती से तैयार रहने का जोश भी भरा था. राहुल गांधी के दौरे के बाद जिस तरीके से कांग्रेस पार्टी ने काम शुरू किया उसमें स्थानीय मुद्दों पर जोर तो जरूर है पार्टी के भीतर बनी गुटबाजी कुछ हद तक किनारे हुई है.

उससे पहले प्रदेश अध्यक्ष को लेकर के जिस तरीके से दीपक बैज और सरगुजा से बाबा की राजनीति पर बयान बाजी होती थी उसे पर एक बड़ा विराम लगा है. उसके साथ ही पार्टी और संगठन के विस्तार को लेकर के भी काम शुरू हुआ है. लेकिन उसमें सबसे बड़ा आधार दीपक बैज का प्रदेश अध्यक्ष के पद पर रहना बना है. आदिवासी समीकरण बनाने में, आदिवासी समीकरण के जिस कार्ड को लेकर के कांग्रेस चली है उसकी दूरी बहुत लम्बी है.

ओबीसी समीकरण का रण

आदिवासी समीकरण का कार्ड भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री पद के लिए लगातार खेलती रही है. ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर कांग्रेस ने भी आदिवासी चेहरे को बैठा रखा है. ओबीसी को साधने के लिए भूपेश बघेल के जिस कार्ड को कांग्रेस पार्टी लेकर चलती है उसका तोड़ फिलहाल भारतीय जनता पार्टी नहीं निकल पाई है. प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर किरण सिंह देव का एक अलग समीकरण है. जिसमें ओबीसी और आदिवासी वोट समीकरण जाति आधार पर उतना बड़ा गोल बंद होता नहीं दिख रहा है. केदार कश्यप पर कार्ड जरूर खेला गया. लेकिन जिस राजनीति को भारतीय जनता पार्टी अपने तरह से गोल बंदी करती है. उसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष वाला कार्ड अभी भी भारतीय जनता पार्टी के माथे पर बल डाल देता है.

क्या होगा राजनीतिक समीकरण ?

ऐसे में बस्तर से शुरू हुए कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर के बाद नया राजनीतिक समीकरण क्या होगा यह आने वाले समय में पता चलेगा. लेकिन एक बात तो साफ है कि कांग्रेस किस राजनीतिक गोलबंदी में भारतीय जनता पार्टी के नए सियासी समीकरण को आदिवासी क्षेत्र में बैठने के लिए विवश जरूर किया है. क्योंकि विकास के मुद्दे पर जिस तरह की बात भारतीय जनता पार्टी करती है.उसमें जाति आधार वाली राजनीति से अलग राग जपना उसके लिए मुश्किल हो रहा है और जाति आधार से अलग ना जा पाने की भारतीय जनता पार्टी की यही मजबूरी कांग्रेस की आदिवासी समीकरण की मजबूती बनती जा रही है.

बीजेपी के मॉडल को कांग्रेस ने कहा लूट का जरिया

भाजपा के प्रचारित बस्तर के कथित विकास मॉडल को स्थानीय बस्तरिया आदिवासियों के विनाश और कॉर्पाेरेट लूट का मॉडल बताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि डबल इंजन सरकार बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ’विकास और सुरक्षा’ के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवार मुआवजे के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और सरेंडर कर चुके समर्पित नक्सली पुनर्वास नीति के लाभों से वंचित हैं। कल ही महाराष्ट्र के गढ़ चिरौली से मुख्यधारा में लौटे 50 से अधिक पूर्व नक्सलियों को उनके गृह क्षेत्र बस्तर भेजा गया, पुनर्वास योजनाओं के वायदों का कितना लाभ उन्हें प्रदान किया गया यह बताने की स्थिति में सरकार नहीं है.

पीड़ित और प्रभावित दर दर भटक रहे हैं, यह सरकार केवल उनके ज़ख्मों की नुमाइश कर रही है.देश के गृहमंत्री अमित शाह ने 2025 के बस्तर पंडुम के दौरान जगदलपुर के सार्वजनिक मंच से घोषणा किया था कि ’नक्सल मुक्त गांव’ घोषित प्रत्येक गांव को विकास कार्यों के लिए पृथक से एक-एक करोड़ रुपए दिया जाएगा, वह सिर्फ कागजी साबित हुआ है. किसी भी गांव को यह राशि जारी नहीं की गई है. बीजेपी सरकार बस्तर के नाम पर केवल झूठे प्रचार का खेल खेल रही है- दीपक बैज, पीसीसी चीफ

बस्तर विकास की राजनीति और कांग्रेस

बस्तर में कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस बस्तर विकास को बड़ी चुनौती बता रही है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि संसाधनों की लूट का विरोध करने वाले निर्दाेष आदिवासियों पर नक्सली सहयोगी होने का ठप्पा लगाकर उन्हें जेलों में ठूंसा गया है, आज जब दुर्दांत नक्सलियों को माफी मिल गई तो फिर उन हजारों आदिवासियों की रिहाई क्यों नहीं हो रही है. जिन पर सहयोगी होने का आरोप है.

उद्योगपतियों से बस्तर लुटवाने का आरोप

सुरक्षा के नाम पर जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है और बस्तर के जल-जंगल-जमीन को उद्योगपतियों के हवाले करके कॉर्पाेरेट लूट को बढ़ावा दिया जा रहा है. जिससे अमीर-गरीब के बीच असमानता खाई की तरह बढ़ रही है. पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ’विश्वास, विकास और सुरक्षा’ की नीति पर काम करते हुए निर्दाेष आदिवासियों की रिहाई के लिए जस्टिस पटनायक समिति बनाई थी, वनोपजों की कीमत और संग्रहण की मात्रा बढ़ाकर आदिवासियों की समृद्धि और बस्तर के संसाधनों की रक्षा की.भाजपा शासन में आदिवासियों का यही भरोसा पूरी तरह टूट चुका है.

प्रदेश का खनिज संसाधन लुटा रही कांग्रेस : दीपक बैज

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार का असली मकसद बस्तर में शांति नहीं, जल-जंगल-जमीन को खाली कराकर कॉरपोरेट घरानों को सौंपना है. नंदराज पर्वत ग्रामसभा की फर्जी एनओसी लगाकर अडानी को सौंप, बैलाडीला, बचेली, किरंदुल की खदानें, आर्सेलर मित्तल को लुटाए हैं. कांकेर के हाहालदी सागर स्टोन को दे दिया गया. बीजापुर और नारायणपुर के जंगल भी उजाड़े जा रहे हैं. शबरी, डंकिनी शंखिनी और इंद्रावती नदियों का पानी, बहुमूल्य खनिज संसाधनों को उद्योगपतियों और अपने चंद पूंजीपति मित्रों की तिजौरी भरने कुर्बान किया जा रहा है.

फर्जी दावा और भ्रामक प्रचार का आरोप

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार के लिए विकास के मायने केवल मोदी के पूंजीपति मित्रों का मुनाफा है. इसके लिए प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय बस्तरिया आदिवासियों के भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है, विनाश को विकास मॉडल बताने फर्जी दावें और भ्रामक विज्ञापनों पर लोकधन को खर्च किया जा रहा है. जनता भाजपा को पूरी तरह से समझ गई है और अब इनकी पूरी पोल खुल चुकी है.

कांग्रेस के लिए युवा सबसे बड़ा मुद्दा

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बस्तर विकास में जगल और जमीन के साथ ही युवा विरोध को लेकर जनता के बीच जाने की बात प्रशिक्षण में रखा है. इसे लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा के कांग्रेस शासन काल में युवाओं के साथ मजाक हुआ है. बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा कि यह सवाल अब छत्तीसगढ़ के हर युवा का है. जिस सरकार के कार्यकाल में सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो गए, वह आज युवाओं के रोजगार और अधिकारों की बात किस नैतिक आधार पर कर रही है. जिस नौकरी को पाने के लिए छत्तीसगढ़ का गरीब और मध्यमवर्गीय युवा वर्षों तक मेहनत करता है, अगर उसी नौकरी की प्रक्रिया में पहले से तय अभ्यर्थियों, रिश्तेदारों और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने का खेल हुआ है, तो यह केवल एक भर्ती घोटाला नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात है.

कांग्रेस बताए, यह कैसी ‘युवा न्याय’ की राजनीति है

उज्ज्वल दीपक ने कहा कि आज कांग्रेस के नेता युवाओं के रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और अवसरों की समानता पर बड़े-बड़े भाषण देते हैं.लेकिन छत्तीसगढ़ में उनकी सरकार के कार्यकाल की भर्ती प्रक्रिया पर गम्भीर आरोप सामने आ रहे हैं. एक तरफ कांग्रेस युवाओं को नौकरी देने की बात करती है, दूसरी तरफ उसके शासनकाल की सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर ही नौकरी बेचने और चयन में पक्षपात के आरोप लगे हैं.यह कैसी विडंबना है कि जिस युवा को नौकरी पाने के लिए वर्षों तक किताबों के साथ संघर्ष करना पड़ा, उसके सामने कथित रूप से सत्ता और पैसे का रास्ता खोल दिया गया!

कांग्रेस शासन की परीक्षाओं पर सवाल

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यह बताना चाहिए कि उनके कार्यकाल में पीएससी की पूरी चयन प्रक्रिया में ऐसी गम्भीर अनियमितताएं कैसे हुईं. उनके कार्यालय और तत्कालीन प्रशासन से जुड़े लोगों के नाम जांच के दायरे में क्यों आ रहे हैं. क्या तत्कालीन मुख्यमंत्री को इस पूरे नेटवर्क की कोई जानकारी नहीं थी. अगर जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई. और अगर जानकारी नहीं थी, तो पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जवाबदेही से मुंह क्यों छिपा रहे हैं.

कल तक कांग्रेस के नेता युवाओं से कहते थे कि उन्हें रोजगार चाहिए.आज छत्तीसगढ़ का युवा पूछ रहा है रोजगार चाहिए था, या रोजगार का बाजार बनाया गया था. कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल के इस कथित ‘नौकरी के खेल’ का जवाब देना चाहिए, उसके बाद ही युवाओं के भविष्य पर राजनीति करनी चाहिए- उज्जवल दीपक, प्रदेश प्रवक्ता बीजेपी

बस्तर विकास को लेकर चिंतित राजनीतिक दल और बस्तर की बुनियाद को मजबूत करने की अपने अपने दावों की राजनीति को लेकर राजनीतिक समीक्षक और पत्रकार उचित शर्मा ने बताया ने सियासत की चाबी बस्तर से आती है.

बस्तर वो जगह हैं जहां आज भी आदिवासी समाज को आसानी से समझाया जा सकता है. भाजपा भी इसी काम को कर रही है. उचित शर्मा ने कहा कि आदिवासी समाज में आज भी गांधी परिवार पर ज्यादा भरोसा है.राहुल गांधी उसकी एक मजबूत कड़ी है. बस्तर के जिस कोने से इसकी शुरुआत हुई है वह बीजेपी की राजनीति के लिए बड़ी चुनौती है- उचित शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार

सरगुजा तक दिखेगा असर

उचित शर्मा के मुताबिक बस्तर में अपनी बड़ी मजबूती का दावा करने वाली बीजेपी 2018 में यहां से गायब हो गई थी. बस्तर और सरगुजा अंचल जिसके साथ होता है सरकार उसी की बनती है. बस्तर से कांग्रेस की शुरुआत ही है, आने वाले समय में इसका असर सरगुजा मेंं भी दिखेगा.

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