शिमला। नगर निगम शिमला शहर में अपनी खाली जमीन का इस्तेमाल कर आय बढ़ाने की तैयारी में है। निगम ने करीब 6200 बीघा जमीन का लैंड बैंक तैयार किया है। अब इस जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने और दुकानें बनाने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
इसके तहत जमीन पर नक्शे पास करवाकर मॉडल के रूप में दुकानें विकसित की जा सकती हैं। इन दुकानों को आगे लीज पर दिया जाए या बेच दिया जाए, इसका फैसला नगर निगम की बैठक में चर्चा के बाद लिया जाएगा। प्रोजेक्ट को पूरा भी लोगों के पैसे से किया जाना प्रस्तावित है।
शहर में निगम की कई जगहों पर जमीन खाली पड़ी है। लंबे समय से इस जमीन का उपयोग कर निगम की आय बढ़ाने की बात कहीं जाती रही है। इसी उद्देश्य से लैंड बैंक तैयार किया गया है। निगम की कमेटी में भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है। अब उम्मीद है कि शनिवार को होने वाली नगर निगम की मासिक बैठक में यह प्रस्ताव सदन के सामने रखा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार निगम अपनी जमीन पर पहले व्यावसायिक परिसर या दुकानें विकसित कर सकता है।
इसके लिए आवश्यक नक्शे पास करवाने के बाद निर्माण कार्य कराया जाएगा। मॉडल तैयार होने के बाद इन दुकानों से निगम को नियमित आय का स्रोत मिल सकता है। यदि दुकानों को लीज पर दिया जाता है तो निगम को लंबे समय तक किराये अथवा लीज राशि के रूप में आमदनी होगी। वहीं, बिक्री का विकल्प अपनाने पर निगम को एकमुश्त बड़ी राशि प्राप्त हो सकती है। बैठक में इसके साथ ही पाकिंग की दरों पर चर्चा की जानी है।
बजट के लिए सरकार पर निर्भरता होगी कम
निगम का मानना है कि अपनी जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर आय के नए साधन विकसित किए जा सकते हैं। इससे विभिन्न विकास कार्यों के लिए निगम को दूसरे स्रोतों अथवा अतिरिक्त बजट पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। दुकानों और व्यावसायिक परिसरों से मिलने वाली आय को शहर के विकास, सड़क, पार्किंग, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं पर खर्च किया जा सकता है।
6200 बीघा जमीन में से कितनी जमीन व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त है, इसका आकलन भी किया जाएगा। इसके अलावा जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों, भवन नक्शों, निर्माण लागत और व्यावसायिक उपयोग की अनुमति सहित अन्य पहलुओं पर भी चर्चा होगी। शनिवार की बैठक में प्रस्ताव आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि निगम जमीन पर दुकानें बनाने की दिशा में किस मॉडल को अपनाता है।
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