राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सड़क धूल प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति में नई दिल्ली के इंदिरा पर्यावरण भवन में आज एनसीआर राज्यों (दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान) के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी)/शहरी विकास विभागों, सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) और नई दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के बीच चार समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौता ज्ञापन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी शहरी सड़कों के पक्कीकरण और हरियालीकरण के मानक ढांचे तथा दिनांक 07.01.2025 के विस्तृत दिशानिर्देश के अनुरूप हैं। इस संरचना का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सड़क चौराहों, मार्ग के उपयोग, हरियालीकरण उपायों और सड़क रखरखाव प्रोटोकॉल में सुधार करना है। सड़कों और खुले क्षेत्रों से धूल नियंत्रण के लिए संरचित कार्य योजना तैयार करने हेतु उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों में इस प्रकार के समन्वित कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया गया है। श्री यादव ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने बताया कि एनसीआर राज्यों और उनके संबंधित नगर निगमों की वार्षिक कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई है, जिनमें अकेले दिल्ली में 448 कार्य बिंदु शामिल हैं। धूल प्रदूषण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री यादव ने कहा कि धूल इस क्षेत्र में पीएम 10 प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि इस पहल के सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेष कार्य बल का गठन किया जाना चाहिए और यातायात जाम एवं धूल प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित सड़कों का वैज्ञानिक मानचित्रण किया जाना चाहिए। हरियाली के महत्व पर जोर देते हुए श्री यादव ने कहा कि खुले क्षेत्रों में कम पानी की आवश्यकता वाले पौधे लगाए जाने चाहिए, जिनकी लगभग 30 उपयुक्त प्रजातियों की पहचान पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पहले ही की जा चुकी है। श्री यादव ने सड़कों से होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक संरचनात्मक उपायों को आगे बढ़ाने में सीएक्यूएम, एनसीआर राज्य सरकारों, सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए के समन्वित प्रयासों की सराहना की और समयबद्ध कार्यान्वयन तथा सशक्त डिजिटल निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया। सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए से अनुरोध किया गया कि वे अपनी सड़क डिजाइन योजनाओं में हरित घटकों को शामिल करें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एनसीआर में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों के तहत ऐसे कार्य किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी हरित दिशानिर्देशों को विकास योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए। श्री यादव ने इस पहल को ‘संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि इस प्रयास के माध्यम से नीति निर्माता, विशेषज्ञ और कार्यान्वयन एजेंसियां एकजुट हुई हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) कार्यकलापों में कण पदार्थ उत्सर्जन में योगदान देने वाले सभी हितधारकों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना मात्र एक प्रक्रियागत अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक प्रतिबद्धता और मिशन है जिसका उद्देश्य ठोस सामाजिक प्रभाव के साथ जमीनी स्तर पर स्पष्ट परिवर्तन लाना है।
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