भरतपुर: केंद्रीय कारागार भरतपुर का चप्पल निर्माण उद्योग अब राजस्थान की जेलों के लिए एक सफल ‘फुटवियर मॉडल’ बनकर उभर रहा है. जेल उद्योगशाला में कैदियों की ओर से तैयार की जा रही चप्पलों की मांग लगातार बढ़ रही है. पिछले एक वर्ष में भरतपुर जेल से राज्य की विभिन्न केंद्रीय और जिला जेलों में करीब 1500 जोड़ी चप्पलों की सप्लाई की जा चुकी है, जबकि 1000 जोड़ी से अधिक चप्पलों के ऑर्डर अभी लंबित हैं.
जेल विभाग ने भी कैंटीनों में बिकने वाली चप्पलों की खरीद भरतपुर जेल से करने के निर्देश दिए हैं. ऐसे में आने वाले समय में राजस्थान की करीब 40 से 50 जेलों की जरूरतें भरतपुर जेल की उद्योगशाला से पूरी होने की संभावना है.
केंद्रीय कारागार भरतपुर के अधीक्षक परमजीत सिंह ने बताया कि जेल में चप्पल निर्माण का कार्य करीब डेढ़ से दो वर्ष पहले शुरू किया गया था. इसके लिए जेल मुख्यालय की ओर से मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं. शुरुआत में उत्पादन सीमित स्तर पर था और ऑर्डर भी कम मिलते थे, लेकिन धीरे-धीरे तैयार होने वाली चप्पलों की गुणवत्ता और उपयोगिता को देखते हुए मांग बढ़ने लगी. अब यह उद्योग जेल के सबसे सफल उत्पादन कार्यों में शामिल हो गया है.
उन्होंने बताया कि जेल विभाग की ओर से यह निर्णय लिया गया है कि राजस्थान की जेलों में संचालित कैंटीनों में बिकने वाली चप्पलों की खरीद प्राथमिकता से भरतपुर जेल से की जाएगी. इस फैसले के बाद भरतपुर जेल की उद्योगशाला को लगातार नए ऑर्डर मिलने लगे हैं. पिछले वर्ष विभिन्न केंद्रीय और जिला जेलों को लगभग 1500 जोड़ी चप्पलों की सप्लाई की गई थी. वर्तमान में कोटा, जोधपुर, सीकर, भीलवाड़ा समेत कई जेलों के करीब 1000 जोड़ी चप्पलों के ऑर्डर लंबित हैं, जिनकी आपूर्ति जल्द की जाएगी.
100 से अधिक जेलों तक पहुंचने की तैयारी : अधीक्षक परमजीत ने बताया कि राजस्थान में 100 से अधिक जेलें संचालित हैं. इनमें लगभग 10 केंद्रीय जेलें और करीब 30 जिला जेलें प्रमुख हैं, जहां कैंटीन व्यवस्था संचालित होती है. वर्तमान में इन्हीं जेलों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है. जैसे-जैसे ऑर्डर बढ़ेंगे, उत्पादन क्षमता भी बढ़ाई जाएगी. जेल प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले समय में 40 से 50 प्रमुख जेलों तक भरतपुर में निर्मित चप्पलों की नियमित सप्लाई होने लगेगी.
कैदियों के हाथों तैयार हो रही चप्पलें : उन्होंने बताया कि जेल उद्योगशाला में चप्पल निर्माण का पूरा काम कैदियों की ओर से किया जाता है. वर्तमान में 7 से 8 प्रशिक्षित कैदी इस कार्य में लगे हुए हैं. ऑर्डर की मात्रा के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाई या घटाई जाती है. कैदी रबर शीट, स्ट्रैप और अन्य आवश्यक सामग्री की मदद से बाथरूम स्लीपर तैयार करते हैं. मशीनों की सहायता से चप्पलों की कटिंग, फिटिंग और फिनिशिंग का काम किया जाता है.
यह कार्य केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि कैदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का भी माध्यम है. जेल में रहते हुए वे एक ऐसा कौशल सीख रहे हैं, जो भविष्य में उनके रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार बन सकता है. इससे रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटने में भी उन्हें मदद मिलेगी.
गुणवत्ता और कीमत बनी पहचान : उन्होंने बताया कि भरतपुर जेल में तैयार होने वाली चप्पलों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी गुणवत्ता और किफायती कीमत है. जेल प्रशासन के अनुसार यहां निर्मित चप्पलें मजबूत, उपयोगी और दैनिक इस्तेमाल के लिए उपयुक्त हैं. वर्तमान में पुरुषों की चप्पल की कीमत 74 रुपए और महिलाओं की चप्पल की कीमत 62 रुपए निर्धारित की गई है.
कम कीमत और अच्छी गुणवत्ता के कारण जेल कैंटीनों में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है. जेलों में इस प्रकार के उद्योग केवल राजस्व का स्रोत नहीं, बल्कि सुधारात्मक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं. कैदियों को काम और कौशल से जोड़ने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे सकारात्मक गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं. भरतपुर जेल का चप्पल निर्माण उद्योग इसी सोच का परिणाम है, जिसने कम समय में राज्य स्तर पर अपनी पहचान बना ली है.
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